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हिंदी ग़ज़ल

तेरी यादों की धूप में जलते रहे उम्र भर हमने सायों से भी तेरा पता पूछा है।
ख़ामोशी की भी अपनी एक ज़ुबान होती है जब दर्द हद से गुज़र जाए तो वही बोलती है।
हमने चाहा था सुकून तेरे साथ में मगर इश्क़ ने हमें तन्हा ही रखा।
मुस्कुराहट ओढ़ ली ज़माने के लिए दिल के आँसू छुपा लिए जमाने के लिए।
जिसे अपना कहा हर दुआ में हमने वही सबसे पहले बेख़बर निकला।
रात ने समझा है हमें दिन से बेहतर हमने आँसू अक्सर अँधेरों में बहाए।
वक़्त ने सब कुछ बदल दिया यहाँ बस कुछ यादें आज भी ताज़ा हैं।
दिल टूटने की आवाज़ नहीं होती बस इंसान अंदर ही अंदर बिखर जाता है।
तेरी कमी हर साँस में महसूस हुई तेरे बिना हर खुशी अधूरी लगी।
हम आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं जहाँ से मोहब्बत ने रास्ता बदला था।
दर्द को आदत बना लिया हमने अब खुशी मेहमान सी लगती है।
मोहब्बत में हार-जीत नहीं होती यहाँ हर दिल कुछ न कुछ हारता है।
तेरी तस्वीर आँखों में रह गई और ज़िंदगी आगे बढ़ती चली गई।
ख़्वाब टूटे तो नींद भी रूठ गई रातें अब सवाल करने लगी हैं।
इश्क़ ने सिखा दिया चुप रहना वरना शिकायतों की भी हद होती है।

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