शेर

हमने चाहा जिसे दिल से वही दूर हो गया अपना समझा था जिसे वही मजबूर हो गया।
दिल ही तो था टूट गया तो क्या हुआ हम भी मुस्कुरा देंगे ज़माना क्या कहेगा।
तुम्हारी यादों का मौसम अब भी आता है पर दिल पहले जैसा मुस्कुरा नहीं पाता है।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बताए नहीं जाते बस चुपचाप दिल में छुपाए जाते हैं।
वो पास होकर भी दूर ही रहे और हम दूर होकर भी उनके रहे।
अब किससे कहें दिल का हाल अपना हर कोई अपनी ही कहानी में खोया है।
जिसे सबसे ज़्यादा चाहा उसी ने रुलाया किस्मत ने हर मोड़ पर हमें आज़माया।
मोहब्बत में हार जाना बुरा नहीं बुरा तो तब है जब अपना ही साथ छोड़ दे।
हमने तो बस दिल लगाया था पर उन्होंने इसे खेल बना दिया।
अब दर्द से दोस्ती सी हो गई है खुशी आती भी है तो अजनबी लगती है।
तन्हाई का आलम कुछ ऐसा है अपने भी अब पराए लगते हैं।
दिल टूटे तो आवाज़ नहीं होती पर दर्द उम्र भर सुनाई देता है।
कुछ रिश्ते बस याद बनकर रह जाते हैं चाहकर भी फिर लौटकर नहीं आते।
हम चुप रहे तो समझ लिया सब ठीक है किसे पता था चुप्पी भी दर्द की निशानी है।
वो बदल गए वक्त के साथ और हम आज भी वहीं खड़े हैं।

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