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कुछ खामोशियाँ भी जवाब होती हैं हर सवाल का शोर से हल नहीं होता।
जिसे अपना समझा वही दूर निकला दर्द तब बढ़ा जब कसूर निकला।
हम हँसते रहे दुनिया के लिए और रोते रहे सिर्फ अपने लिए।
वक़्त ने सिखा दिया सब्र करना वरना हम भी बहुत जवाब रखते थे।
दिल के ज़ख्म दिखते नहीं हैं पर हर साँस में चुभते हैं।
उम्मीदें जितनी ऊँची थीं टूटने की आवाज़ उतनी गहरी थी।
कभी जो पास था आज याद बन गया और जो सपना था वह दर्द बन गया।
हमने छोड़ना नहीं सीखा था लोग छोड़कर सिखा गए।
खुश रहने की आदत डाल ली हमने दर्द को भी मुस्कान में छुपा लिया।
अब शिकायत नहीं किसी से दर्द भी अपना लगता है।
वो बदल गए तो क्या हुआ हम भी चुप हो गए।
तन्हाई ने आज फिर समझाया भीड़ में भी कोई अपना नहीं होता।
दिल ने बहुत सहा है चुपचाप आवाज़ होती तो शहर जाग जाता।
कुछ रिश्ते किताब जैसे होते हैं अधूरे रह जाएँ तो भी याद रहते हैं।
हम आज भी वहीं खड़े हैं जहाँ किसी ने कहा था—मैं लौट आऊँगा।
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