प्रेम कहानी ❤️❤️ ❤️ ❤️ ❤️


बरसात की एक शाम थी। शहर की पुरानी लाइब्रेरी में किताबों की खुशबू फैली हुई थी। वहीं आरव पहली बार अनन्या से मिला। अनजाने में दोनों के हाथ एक ही किताब पर आ टिके—और उसी पल नज़रें मिलीं।

कोई बड़ा संवाद नहीं हुआ, बस एक हल्की-सी मुस्कान… मगर दिल ने बात पकड़ ली।

दिन बीतते गए। लाइब्रेरी उनकी मुलाक़ातों की जगह बन गई। कभी चाय पर बातें, कभी खामोशी में साथ बैठना—दोनों को एहसास हुआ कि प्यार सिर्फ़ कहने से नहीं, समझने से होता है।
आरव हर छोटी बात याद रखता, अनन्या हर मुश्किल में उसका हौसला बन जाती।

फिर वक़्त ने परीक्षा ली। आरव को दूसरे शहर में नौकरी मिल गई। दूरी आई, मगर दिलों में नहीं। रोज़ की कॉल, देर रात के मैसेज—प्यार ने दूरी को छोटा कर दिया।
अनन्या ने कहा, “अगर इंतज़ार करना पड़े, तो भी मैं तैयार हूँ।”
आरव बोला, “और अगर लौटना पड़े, तो मैं ज़रूर लौटूँगा।”

एक साल बाद वही लाइब्रेरी, वही बरसाती शाम। आरव लौटा—हाथ में वही किताब।
अनन्या मुस्कुराई। इस बार शब्द ज़रूरी नहीं थे।
प्यार ने अपना वादा निभा दिया था।

क्योंकि सच्चा प्रेम दूरी से नहीं, नीयत से पहचाना जाता है। ❤️

Comments