हिंदी ग़ज़ल

तेरी यादों का दिया जलता रहा रात भर दिल से जाती नहीं वो मुलाक़ात भर।
हमने चाहा था जिसे सुकून की तरह वो मिला भी तो बस एक ख़्वाब भर।
मुस्कुराहट के पीछे दर्द का शहर है हर चेहरा यहाँ खुद में एक सफ़र है।
इश्क़ ने हमसे बहुत कुछ छीन लिया फिर भी दिल को जीने का हुनर है।
रात चुपचाप तुझे याद करती रही चाँद भी मेरी तन्हाई पढ़ता रहा।
जिसे अपना कहा वही दूर हुआ दिल का हर भरोसा चूर हुआ।
ज़िंदगी ने सिखाया है खामोश रहना क्योंकि हर बात का जवाब शोर नहीं।
खामोश दिल भी बहुत कुछ कहता है बस सुनने वाला कोई और नहीं।
तेरी कमी हर लम्हा खलती रही साँसें चलती रहीं रूह जलती रही।
हर खुशी अधूरी सी लगती है जब याद तेरी दिल से चिपकी रहती है।
दिल ने बहुत चाहा तुझे भूल जाना पर हर दुआ में तेरा ही नाम आया।
वक्त ने बदला बहुत कुछ यहाँ पर दर्द वही पुराना रह गया।
मोहब्बत में जीत किसी की नहीं यहाँ बस यादों का मेला लगता है।
तेरी तस्वीर दिल में बस गई हर राह मुझसे मेरी खुशी छीन गई।
इश्क़ ने तोड़ा भी जोड़ा भी दर्द देकर जीना सिखा दिया।

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