1) सच्चा प्यार
राहुल रोज़ कॉलेज जाते समय एक लड़की को बस स्टॉप पर देखता था। दोनों कभी बोले नहीं, पर मुस्कान का आदान-प्रदान होने लगा। एक दिन लड़की नहीं आई। कई दिनों तक नहीं आई।
कुछ महीनों बाद अचानक वह अस्पताल में मिली—अपने बीमार पिता की सेवा करते हुए। राहुल रोज़ उसकी मदद करने लगा। वहीं से उनकी दोस्ती और फिर प्यार शुरू हुआ।
उन्हें समझ आया—प्यार दिखावे से नहीं, साथ निभाने से बनता है।
2) गरीब लड़के का सपना
एक गरीब लड़का रात में स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करता था। लोग मज़ाक उड़ाते थे, पर वह चुप रहता। सालों की मेहनत के बाद वही लड़का बड़ा अफसर बना।
जब लोग बधाई देने आए, उसने बस इतना कहा—
“रोशनी कहीं भी हो, बस मेहनत सच्ची होनी चाहिए।”
3) माँ का इंतज़ार
एक बेटा नौकरी के लिए शहर चला गया। माँ रोज़ दरवाज़े पर बैठकर उसके फोन का इंतज़ार करती।
सालों बाद बेटा बड़ा आदमी बनकर लौटा, पर माँ अब दुनिया में नहीं थी।
उसे तब समझ आया—
दुनिया जीतने में उसने अपना घर हार दिया।

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