ख़ामोशी ने आज फिर सब कुछ कह दिया जो लफ़्ज़ों से न हुआ वो नज़रें कह गईं।
जिसे अपना समझा वही बेगाना निकला दिल का भरोसा भी एक फ़साना निकला।
हम मुस्कुराते रहे दर्द छुपाने के लिए और दुनिया ने समझ लिया—सब ठीक है।
वक़्त ने सिखा दिया अकेले चलना हमें अब भीड़ में भी तन्हाई साथ रहती है।
मोहब्बत में अधूरापन भी मुकम्मल होता है कुछ रिश्तों का टूटना भी ज़रूरी होता है।
जिससे सबसे ज़्यादा उम्मीद थी ज़िंदगी में उसी ने सिखाया कि भरोसा टूटता है।
ख़्वाबों ने भी अब आँखों से दूरी रख ली शायद उन्हें भी टूटने का डर लग गया।
हमने चाहा भी तो टूटकर चाहा किसी को और वही हमें अधूरा छोड़ गया।
दर्द ने ही हमें इंसान बनाया है वरना हर कोई यहाँ बस मुस्कान दिखाता है।अब शिकायत नहीं है किसी से भी हमें ख़ामोशी ने ही जवाब देना सिखा दिया।
