हम मुस्कुराते रहे दर्द छुपाने के लिए और दुनिया ने समझ लिया—हमें कोई ग़म नहीं।
जिससे सबसे ज़्यादा उम्मीद थी ज़िंदगी में उसी ने सिखाया कि भरोसा भी टूटता है कहीं।
हमने जिसे अपना समझकर थाम लिया था वही हाथ सबसे पहले छूट गया।
शिकायत किससे करें अब इस दिल की दर्द वही देता है, जिस पर सबसे ज़्यादा भरोसा होता है।
ख़ामोशियों ने आज फिर आवाज़ छीन ली टूटे हुए दिल ने भी शिकायत छोड़ दी।
हम निभाते रहे रिश्ते आख़िरी साँस तक और उन्हें लगा… आदत थी, मोहब्बत नहीं।
हमने हर दर्द को सीने में दबाए रखा और लोग पूछते रहे—इतने खामोश क्यों हो।
जिसे समझना सबसे आसान था हमारे लिए वही हमें उम्र भर समझ न पाया।
हमने चाहा भी तो टूटकर चाहा किसी को और वही हमें अधूरा छोड़ गया।
अब दर्द भी शिकायत नहीं करता दिल से शायद उसे भी अकेले रहने की आदत हो गई।
