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Hindi GAZAL

दिल ने तुझसे दूर रहकर भी वफ़ा सीखी है धूप में जलकर भी आँखों ने घटा सीखी है।

याद की गलियों में हर शाम ठहर जाता हूँ वक़्त से हमने भी थोड़ी-सी अदा सीखी है।
टूटकर भी जो संभल जाए वही दिल होता है दर्द से हमने मुस्कुराने की सदा सीखी है।
भीड़ में रहकर भी तन्हा जो रहा करता है उसने ख़ुद से ही मोहब्बत की दुआ सीखी है।
रात ने चुपचाप दिल से कुछ कहा है आज फिर याद ने पलकों पे आँसू टाँक दिया है आज फिर।
शहर की गलियों में खोई-सी हमारी पहचान आईने ने हमसे सारा सच कहा है आज फिर।
वक़्त के हाथों में रिश्तों की लकीरें थक गईं इश्क़ ने हर ज़ख़्म को अपना लिया है आज फिर।
हमने चाहा था सुकून-सा एक लम्हा उम्र भर ज़िंदगी ने हमसे सारा हौसला है आज फिर।
दिल ने ख़ामोशी से तुझको पुकारा है बहुत रात ने तन्हाई में ख़ुद को निहारा है बहुत।
याद की बारिश में भीगते रहे उम्र भर हर लम्हे ने तेरे होने का इशारा है बहुत।
हमने टूटकर भी रिश्तों को थामे रखा वक़्त ने परख लिया सब्र हमारा है बहुत।
भीड़ में रहकर भी तन्हा जो रह जाता है उसने ही इश्क़ को सच में उतारा है बहुत।

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