हम मुस्कुराते रहे दर्द छुपाने के लिए और लोग समझते रहे—हमें कोई ग़म नहीं।
जिसे अपना समझा, वही दूर निकल गया दिल का भरोसा भी आज सवाल बन गया।
ख़ामोशी ने जब आवाज़ छीन ली मेरी तब दर्द ने ही दिल की बात समझी।
हमने चाहा भी तो टूटकर चाहा किसी को और वही हमें अधूरा छोड़ गया।
भीड़ में रहकर भी तन्हा रहे उम्र भर शायद यही हमारी सबसे बड़ी सज़ा थी।
जिससे सबसे ज़्यादा उम्मीद थी ज़िंदगी में उसी ने सिखाया कि भरोसा टूटता है।
आँखों ने रोना छोड़ दिया अब तो दर्द ने दिल में घर बना लिया है।
हम निभाते रहे रिश्ते आख़िरी साँस तक उन्हें लगा—आदत थी मोहब्बत नहीं।
वक़्त ने सिखा दिया चुप रहना हमें अब हर सवाल का जवाब ख़ामोशी है।
ख़्वाब भी डरने लगे अब आँखों से टूटने का डर उन्हें भी सताता है।
हमने हर किसी को ख़ुद से पहले रखा और आख़िर में खुद ही अकेले रह गए।
दिल की किताब में कुछ पन्ने ऐसे भी हैं जो पढ़े जाएँ तो आँखें भीग जाती हैं।
अब शिकायत नहीं है किसी से भी हमें दर्द से भी समझौता कर लिया है।
जिस दिन हमें समझा जाता थोड़ा-सा भी शायद उस दिन हम टूटते नहीं।
हम आज भी वही हैं जो कल थे बस अब किसी से उम्मीद नहीं रखते।
