ख़ामोशी ने आज फिर सब कुछ कह दिया जो लफ़्ज़ों से न हुआ वो नज़रों ने कह दिया।
जिसे अपना समझा वही बेगाना निकला दिल का भरोसा भी एक फ़साना निकला।
हम मुस्कुराते रहे दर्द छुपाने को दुनिया समझती रही—सब ठीक है।
वक़्त ने सिखा दिया अकेले चलना अब भीड़ में भी तन्हाई साथ रहती है।
मोहब्बत में अधूरापन भी मुकम्मल होता है कुछ रिश्तों का टूटना भी ज़रूरी होता है।
जिससे सबसे ज़्यादा उम्मीद थी हमें उसी ने सबसे गहरी चोट दी।
ख़्वाबों ने भी अब दूरी बना ली है शायद उन्हें भी टूटने का डर है।
हमने चाहा भी तो टूटकर चाहा और वही हमें अधूरा छोड़ गया।
दर्द ने हमें इंसान बनाया वरना हर कोई बस मुस्कान दिखाता है।
अब शिकायत नहीं किसी से हमें ख़ामोशी ने जवाब देना सिखा दिया।
आईने ने भी आज सवाल पूछ लिया कहाँ गई वो हँसी जो कभी थी।
हमने हर रिश्ते को दिल से निभाया कुछ लोग इसे हमारी कमज़ोरी समझ बैठे।
यादें भी अब सोच-समझकर आती हैं हर ज़ख़्म को छेड़ना अच्छा नहीं।
हम आज भी वही हैं बस फर्क इतना है अब किसी से उम्मीद नहीं रखते।
अगर कोई पूछे हमारी कहानी तो कहना—ख़ामोशी में लिखी गई है।
