दिल ने हर बार तुझे ही याद किया भूलने की हमने हर कोशिश नाकाम की।
रात की चुप्पी में जब बात हुई तुझसे नींद ने भी आँखों से शिकायत की।
हमने चाहा था सुकून-सा एक पल ज़िंदगी ने मगर पूरी कहानी लिख दी।
तेरी यादों का असर कुछ यूँ रहा हँसते-हँसते भी आँखें नम हो गईं।
वक़्त ने बदली कई तस्वीरें यहाँ पर दिल की तस्वीर वही रह गई।
ख़ामोशी ने जो कहा वो सुन लिया हमने लफ़्ज़ों ने तो बस औपचारिकता की।
भीड़ में रहकर भी तन्हा रहे हम शायद यही इश्क़ की पहचान बनी।
जिसे निभाने का वादा किया था उम्र भर वही बात आज एक याद बन गई।
हमने हर दर्द को शेर बना लिया और लोग कहने लगे—कला अच्छी है।
तेरी मौजूदगी ही काफ़ी थी कभी अब कमी भी बहुत कुछ कह जाती है।
आईने ने भी सवाल पूछ लिया आज कहां गई वो मुस्कान जो कभी थी।
इश्क़ आसान नहीं होता जनाब ये तो हर रोज़ नई परीक्षा लेती है।
हमने छोड़ा नहीं किसी को जानबूझकर बस कुछ लोग ख़ुद ही दूर हो गए।
यादें भी अब सोच-समझकर आती हैं हर ज़ख़्म को छेड़ना उन्हें भी अच्छा नहीं।
अगर ग़ज़ल में मेरी पहचान हो तो बस इतना कहना—दिल से लिखी थी।
