मुस्कुराने की आदत थी कभी आज वजह भी उदास रहती है।
हमने चाहा उसे टूटकर और उसने छोड़ा भी पूरे सुकून से।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बताए नहीं… बस सह लिए जाते हैं।
वो दूर क्या हुआ हमसे ज़िंदगी ही रूठ गई।
आँखें आज भी ढूँढती हैं उसे जो कह गया था अब लौटकर नहीं आऊँगा।
हमने तो ख़ामोशी से प्यार किया और बदले में तन्हाई मिली।
दिल ने भरोसा किया था जिस पर उसी ने सबसे ज़्यादा तोड़ा।
अब किसी से शिकायत भी क्या करें अपनी ही पसंद ने रुलाया है।
तेरी यादों का बोझ इतना भारी है कि हँसी भी थक कर बैठ जाती है।
हम आज भी वही हैं बस खुश रहने का हुनर खो बैठे हैं।
जिसे अपना सब कुछ माना वही सबसे बड़ा अधूरापन बन गया।
रातें लंबी हो गई हैं और नींद हमसे नाराज़।
दर्द तब बढ़ जाता है जब कोई समझने वाला भी न हो।
हमने छोड़ा नहीं कभी बस वक़्त ने जुदा कर दिया।
कुछ कहानियाँ पूरी नहीं होतीं बस याद बनकर रह जाती हैं।
सैड शायरी
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