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हिंदी ग़ज़ल

 

ख़ामोशी भी अब कुछ कहने लगी है तेरी कमी मुझे सहने लगी है।
वो आए तो लगा जैसे बहार आ गई वो गए तो हर खुशी उदास हो गई।
दिल ने चाहा बहुत मगर कह न सके आँखों ने सब कहा हम रह न सके।
तेरी यादों का मौसम ठहरता ही नहीं दिल का कोई भी ज़ख़्म भरता ही नहीं।
हमने छोड़ा नहीं वक़्त ने दूर किया वरना इश्क़ आज भी पूरा होता।
कुछ रिश्ते लफ़्ज़ों से आगे निकल जाते हैं फिर सिर्फ़ एहसास बनकर रह जाते हैं।
तेरा नाम ही काफी था मुस्कुराने को अब वजहें ढूँढनी पड़ती हैं जीने को।
इश्क़ में हार कर भी जीत जाते हैं लोग बस अपना सब कुछ हार जाते हैं लोग।
तेरे बाद सादगी भी भारी लगती है हँसी भी अब उधारी लगती है।
हमने खुद को खोकर तुझे पाया था अब खुद को ढूँढते हैं, तू याद आता है।
तू पास न सही एहसास तो है दिल आज भी तेरे पास तो है।
तेरी एक आदत सी बन गई है जो छूटकर भी छूटती नहीं।
वो वादा भी कितना अजीब था जो निभाया भी गया टूटा भी।
दिल ने हर बार तुझ पर ऐतबार कियाऔर हर बार खुद को ही सज़ा दी।
अगर इश्क़ मुकम्मल होता ज़रूर तो शायद ग़ज़लें अधूरी न होतीं।

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