छोटे से पहाड़ी शहर में रहने वाला आरव रोज़ शाम को झील के किनारे बैठकर गिटार बजाया करता था। एक दिन वहीं उसकी मुलाकात नंदिनी से हुई, जो अपनी किताब लेकर अक्सर वहाँ पढ़ने आती थी।
पहले दोनों बस एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते। फिर धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं—पसंद, नापसंद, सपने, डर… सब साझा होने लगा। शाम की वो मुलाकातें कब उनकी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गईं, उन्हें पता ही नहीं चला।
लेकिन एक दिन नंदिनी को पढ़ाई के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा। जाते वक्त उसने कहा,
“अगर प्यार सच्चा हुआ, तो दूरी हमें अलग नहीं करेगी।”
समय बीतता गया, दूरी बढ़ी, लेकिन उनका प्यार नहीं बदला। रोज़ रात को फोन पर बातें, सपनों की योजनाएँ और मिलने का इंतज़ार—यही उनका सहारा था।
दो साल बाद, उसी झील के किनारे आरव गिटार बजा रहा था, तभी पीछे से आवाज आई,
“अब भी वही गाना?”
वह मुड़ा—नंदिनी सामने खड़ी थी। इस बार जाने के लिए नहीं, हमेशा के लिए लौट आई थी।
आरव ने मुस्कुराकर कहा,
“कुछ चीज़ें बदलती नहीं… जैसे मेरा प्यार।”
और उस दिन झील के किनारे सिर्फ गिटार नहीं, दो दिलों की धड़कनें भी एक साथ गूंज रही थीं।
सच्चा प्यार दूरी नहीं, धैर्य और भरोसे से जीता जाता है। ❤️
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