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हिंदी ग़ज़ल

दिल की बातों को लफ़्ज़ों में ढाल लिया तेरी यादों को आँखों में पाल लिया।
हमने हर दर्द को हँसकर सहना सीखा तूने छोड़ा तो जीना भी सीख लिया।
चुपचाप बहते रहे अश्क आँखों से लोग समझे कि हमने सब भुला दिया।
ज़िंदगी ने कई रंग दिखाए हमें हर एक रंग में तेरा नाम मिला।
तेरे बाद कुछ यूँ तन्हा हुए हम भीड़ में रहकर भी अकेले रहे हम।
वक़्त ने सिखा दी खामोशी की ज़ुबाँ अब हर सवाल का जवाब चुप्पी बना।
तेरी मुस्कान ही मेरी पहचान बनी तेरे बिना ये दुनिया वीरान लगी।
जो मिला उसी में ख़ुश रहना सीख लिया जो न मिला उसे ख़्वाब मान लिया।
दिल की बस्ती में अब सन्नाटा है तेरी यादों का बस आना-जाना है।
हमने चाहा था उम्र भर साथ तेरा क़िस्मत को मगर कुछ और ही मंज़ूर था।
हर मोड़ पर तेरा इंतज़ार रहा फिर भी ये दिल तुझसे वफ़ादार रहा।
तेरे जाने के बाद भी ये दिल हर दुआ में तेरा नाम लेता रहा।
कुछ ख़्वाब अधूरे ही अच्छे लगे पूरे होते तो शायद टूट जाते।
मोहब्बत में हमने ये सीखा है हर किसी को पाना ज़रूरी नहीं होता।
लफ़्ज़ कम पड़ गए हाल-ए-दिल के लिए ख़ामोशी ही अब मेरी ग़ज़ल बन गई।

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