खामोशी में भी शोर बहुत है दिल टूटा है, मगर कहा नहीं है।
हम मुस्कुरा तो रहे हैं दुनिया के लिए अंदर से मगर बिखर चुके हैं पूरी तरह।
तेरे बिना जी तो रहे हैं पर जीने का सलीका भूल गए हैं।
वो छोड़ गया बड़ी आसानी से और हम हर रोज़ खुद को समेटते रहे।
कभी जो हमारा सब कुछ था आज वही सबसे अजनबी बन गया।
आँखों में नमी दिल में सवाल बताओ अब किससे करें अपना हाल।
वक़्त ने जख़्म ऐसे दिए हैं कि अब मरहम से भी डर लगता है।
तेरी यादें आज भी आती हैं बस फर्क इतना है—अब रुलाती हैं।
हमने तो बस सच्चा प्यार किया था गलती शायद यही सबसे बड़ी थी।
भीड़ में रहकर भी तन्हा हूँ तेरे बिना अधूरा हूँ, सूना हूँ।
दिल ने चाहा था जिसे टूटकर उसी ने तोड़ा हमें सबसे ज़्यादा।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो बताए नहीं बस सहे जाते हैं।
हम आज भी तुझे दुआओं में रखते हैं और तू है कि हमें याद भी नहीं करता।
मोहब्बत में हार गए हम अब खुद से ही सवाल करते हैं।
तेरे बाद ज़िंदगी से शिकायत नहीं बस अब किसी से उम्मीद नहीं।
सैड शायरी
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