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शेर

हमने जो चाहा वो मुक़द्दर न हुआ दिल टूट गया मगर शिकवा न हुआ।
वो लम्हे जो कभी अपने थे आज यादों के सिवा कुछ भी न रहे।
खामोशी में भी शोर बहुत होता है जब दिल टूटता है तो दर्द बहुत होता है।
हम मुस्कुराए तो ज़माना समझ बैठा खुश हैं किसे पता था कि ये हँसी भी एक पर्दा है।
जिसे अपना समझा वही पराया निकला भरोसा सबसे बड़ा धोखा निकला।
दिल ने चाहा बहुत पर कहा कुछ नहीं दर्द सहते रहे मगर रोया कुछ नहीं।
वक़्त ने सब बदल दिया इस कदर हम वही रहे सब कुछ बदल गया उधर।
तन्हाई का आलम कुछ ऐसा है भीड़ में भी दिल अकेला सा है।
कुछ सपने आँखों में ही टूट गए और हम उन्हें ज़िंदगी समझ बैठे।
मोहब्बत की थी कोई गुनाह नहीं फिर भी सज़ा उम्र भर मिली हमें।
अब किसी से उम्मीद नहीं रखते दिल टूटने का हुनर आ गया है।
हमने छोड़ा नहीं किसी का साथ पर लोग छोड़ते चले गए।
दिल की बातें दिल में रह गईं लबों तक आते-आते थक गईं।
जिसे भूलना था वही याद आया और जिसे चाहा वही दूर गया।
खुद से ही सवाल करते रह गए और जवाब वक़्त देता चला गया।

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