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हिंदी ग़ज़ल

तेरे जाने से खाली सा घर हो गया दिल का हर कोना बिखर सा गया।
कदम लड़खड़ाए मगर रुके नहीं हम टूटे सही मगर झुके नहीं।
तेरी हँसी की चमक अब कहाँ इन आँखों में बस धुंध सी रही।
इश्क़ की आग में जलते रहे खुद को ही हम बदलते रहे।
वो जो कहते थे साथ निभाएँगे आज किसी और के संग मुस्कुराएँगे।
हर शाम तेरी याद लेकर आती है तन्हाई फिर से रुलाती है।
दिल को समझाना आसान नहीं तेरी यादों से जान बचाना आसान नहीं।
हमने तो दुआओं में माँगा था तुझे तूने ही दुआओं का असर तोड़ दिया।
तेरी तस्वीर अब भी संभाल रखी है दिल में तेरी याद बसा रखी है।
ज़ख्म इतने मिले कि गिन न सके दर्द इतना मिला कि सह न सके।
तेरी मोहब्बत का असर ऐसा हुआ खुद से भी अब भरोसा न रहा।
रिश्तों की डोर कमज़ोर निकली थोड़ी सी आँधी में ही टूट निकली।
हमने चाहा था जिसे जान से ज़्यादा वो निकला ही नहीं अपना इरादा।
आज भी दिल तेरा नाम लेता है हर धड़कन में तेरा ही चेहरा रहता है।
इश्क़ अधूरा ही अच्छा लगता है पूरा हो जाए तो डर सा लगता है।

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