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हिंदी ग़ज़ल

दिल में तेरी याद का उजाला रहा रात भर आँखों में हवाला रहा हमने चाहा तुझे खुद से बढ़कर फिर भी किस्मत को ये गवारा रहा।
चाँद तन्हा था सितारों के बीच मैं भी तन्हा था बहारों के बीच तेरा चेहरा ही नज़र आता रहा हर तरफ़ भीड़ थी हज़ारों के बीच।
वक़्त ने कैसी ये करवट ली है हर खुशी जैसे सिसकती सी है जिसे अपना समझा था हमने आज वो शख़्स अजनबी सी है।
इश्क़ में दिल को जलाना पड़ा खुद को हँसकर भुलाना पड़ा तू मिला ही नहीं किस्मत से हमें आँसू भी छुपाना पड़ा।
तेरी चाहत का असर ऐसा था हर लम्हा जैसे सुनहरा सा था तेरे बिन अब ये जहाँ सूना है दिल भी वीरान सा लगता था।
ख़्वाब आँखों में सजाए हमने दर्द सीने में छुपाए हमने तू न आया तो गिला क्या करना खुद को हर रोज़ मनाए हमने।
रात चुपके से गुजर जाती है याद तेरी मुझे तड़पाती है नींद आती भी नहीं आँखों में बस तेरी सूरत नज़र आती है।
दिल की धड़कन में नाम तेरा है मेरी हर साँस पे हक़ तेरा है तू जो रूठे तो जहाँ रूठे मेरे हर ख्वाब में घर तेरा है।
चाहतों का सफर अधूरा है तेरे बिन ये शहर अधूरा है तू जो साथ हो तो सब पूरा वरना हर पल ही अधूरा है।
मुस्कुराने की वजह तू ही है दिल की धड़कन की सदा तू ही है तेरे बिन अब तो ये हाल हुआ मेरी हर दुआ में दुआ तू ही है।
तू जो मिला तो करार आ गया सूना दिल भी बहार आ गया तेरी आवाज़ की हल्की दस्तक जैसे जीने का खुमार आ गया।
दिल ने चाहा तुझे टूटकर हमने पाया तुझे रूठकर ये मोहब्बत भी अजीब रही हम हँसते रहे खुद को लूटकर।
तेरी यादों का समंदर गहरा दिल का हर जख्म हुआ है ठहरा हमने चाहा तुझे हर पल मगर वक़्त निकला बहुत ही सख़्तहरा।
चाँद भी आज उदास लगता है तेरे बिन सब कुछ ख़ास लगता है तू जो पास हो तो रौशन है जहाँ वरना हर पल निराश लगता है।
दिल की बस्ती उजड़ सी गई तेरी दूरी भी जकड़ सी गई हमने चाहा तुझे हर दम मगर किस्मत फिर भी बिगड़ सी गई

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