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शेर

दिल में जो बात थी कह न सके आँखों से अश्क भी बह न सके।
तेरी यादों का असर ऐसा है नींद आए भी तो सो न सके।
इश्क़ में हमने ये जाना है हँसते चेहरे में भी वीराना है।
वक़्त बदलता रहा हालातों को दिल ने तुझको ही ठिकाना माना है।
तन्हाई का आलम क्या कहिए खुद से मिलना भी गवारा नहीं।
तेरी चाहत में यूँ डूबे हैं अब किनारा भी किनारा नहीं।
जो मिला वो मुकद्दर निकला जो खोया वो दिल के अंदर निकला।
रात भर चाँद से बातें कीं दर्द फिर भी वही समंदर निकला।
किस्मत से शिकायत क्या करें जिसे चाहा वही दूर मिला।
दिल को समझाना आसान नहीं इश्क़ कोई मेहमान नहीं।
तेरे बिन सूनी सी राहें हैं जैसे बिना मौसम की चाहें हैं।
हमने हर ग़म को हँसकर सहा दिल ने तेरा नाम ही कहा।
ख़्वाब टूटे तो हकीकत समझी अपनों में भी सियासत समझी।
आँखों में नमी सी रहती है तेरी कमी सी रहती है।
अब न उम्मीद है न गिला कोई दिल में बस एक सिलसिला कोई।

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