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हिंदी ग़ज़ल

दिल की बस्ती में उजाला सा हुआ तेरी यादों का हवाला सा हुआ रात खामोश थी लेकिन फिर भी नाम तेरा ही दुबारा सा हुआ।इश्क़ का जादू असर कर ही गया दिल को तेरा हमसफ़र कर ही गया दर्द था सीने में चुपके-चुपके ज़िक्र तेरा उसे सर कर ही गया।
चाँद निकला तो तेरी याद आई रात महकी तो तेरी बात आई हमने सोचा था भूल जाएंगे हर दुआ में मगर सौगात आई।
वक़्त ने हमको संभाला भी बहुत ज़ख्म दिल का था निराला भी बहुत तेरे जाने का असर यूँ निकला आँख नम थी पर उजाला भी बहुत।
ख़्वाब आँखों में सजाए रखे तेरे वादे भी निभाए रखे हमने सीखा है मुहब्बत में दर्द सीने से लगाए रखे।
रात तन्हा थी सितारों के बिना दिल था खाली तेरे प्यारों के बिना ज़िंदगी कैसे गुज़रती हमसे तेरे मीठे से इशारों के बिना।
तेरी हँसी में सुकून मिलता है दिल को जैसे जुनून मिलता है जब भी सोचें तुझे तन्हाई में जीने का फिर सबब मिलता है।
हमने चाहा तुझे दिल से ज़्यादा रिश्ता निकला था दुआ से ज़्यादा तू अगर पास रहे उम्र भर और क्या चाहिए ख़ुदा से ज़्यादा।
राह में काँटे भी आते होंगे ख़्वाब टूटे भी तो जाते होंगे फिर भी दिल ये नहीं मानता तेरे जैसे कहाँ पाते होंगे।
इश्क़ में हार भी जीत लगती है तेरी हर बात प्रीत लगती है जब से देखा है तुझे हमने हर दुआ अब संगीत लगती है।
दिल ने हर बात छुपाई तुमसे फिर भी दूरी न निभाई तुमसे कैसे मानें कि जुदा हैं हम साँस भी आती है भाई तुमसे।
ज़िंदगी का सफ़र आसान नहीं दिल का हर ज़ख्म भी मेहमान नहीं फिर भी हँसते हैं हम दुनिया में क्योंकि तू साथ है अनजान नहीं।
तेरे ख़्वाबों का शहर बसाया है दिल को उम्मीद से सजाया है तू मिले या न मिले किस्मत से नाम तेरा ही दोहराया है।
रात गहरी है मगर डर कैसा तेरे होने से सफ़र कैसा दिल में बस तू ही तू रहता है अब जहाँ में कोई पराया कैसा।
तन्हाई ने जो सिखाया हमको दर्द में भी मुस्कुराया हमको तेरे जाने के बाद ऐ जानां वक़्त ने खूब आज़माया हमको।

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