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शेर

हमने हर दर्द को हँसकर सह लिया ताकि कोई हमारी कमजोरी न देख पाए।
वो चुप रहे और हम समझते रहे यही हमारी सबसे बड़ी भूल थी।
दिल ने बहुत भरोसा किया इसीलिए सबसे ज़्यादा टूटा।
कुछ लोग पास रहकर भी दूर होते हैं और कुछ दूर रहकर भी दिल में बस जाते हैं।
ख़ामोशी अब हमारी आदत बन गई है क्योंकि हर बात कहने लायक नहीं होती।
हम आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं जहाँ तुमने लौटने का वादा किया था।
जिसे अपना समझा वही पराया निकला सबक ज़िंदगी ने देर से सिखाया।
हमने चाहा बहुत जताया नहीं और वो समझे कि हमें फ़र्क नहीं पड़ा।
तन्हाई से अब शिकायत नहीं रही उसने भी साथ निभाना सीख लिया।
वक़्त ने चेहरों को बदलते देखा दिल वही रहा बस भरोसा नहीं।
कुछ रिश्ते सवाल बनकर रह जाते हैं जिनका कोई जवाब नहीं होता।
हम टूटे भी तो आवाज़ नहीं आई शायद सहने की आदत पड़ गई थी।
तेरे बाद किसी से दिल नहीं लगा ये डर भी इश्क़ का हिस्सा बन गया।
भीड़ में भी अकेले रहना सीख लिया क्योंकि साथ देने वाले कम होते हैं।
अगर मोहब्बत मुकम्मल होती तो शायद ये शेर न लिखे जाते।

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