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हिंदी ग़ज़ल

तेरे बाद हर रास्ता सूना लगा मुझे ये शहर भी अब कुछ अपना न लगा मुझे।
हमने चाहा था उम्र भर साथ निभाना वक़्त ने मगर कुछ और ही लिख डाला।
ख़ामोशी की ज़ुबान समझते रहे हम और लोग कहते रहे कि कुछ कहा नहीं।
दिल के हर ज़ख़्म को मुस्कान दे दी तूने बेरुख़ी को भी पहचान दे दी।
रात भर जागकर सोचा यही बार-बार क्या मोहब्बत भी होती है यूँ शर्मसार?
हमने खुद को खो दिया तुझे पाने में तू मिला भी तो बस एक अफ़साने में।
तू दूर होकर भी पास सा लगता है यही इश्क़ है जो हर दूरी में जलता है।
कभी सुकून तो कभी दर्द दे जाती है याद तेरी हर रोज़ रुला जाती है।
हमने जो लिखा वो दर्द बन गया और जो छुपाया वही ग़ज़ल बन गया।
तेरे लफ़्ज़ों का जादू कुछ ऐसा चला दिल ने हर सवाल का जवाब भुला दिया।
मोहब्बत में शर्तें नहीं होतीं साहब वरना दिल टूटने से पहले ही रुक जाता।
तन्हाई से अब दोस्ती सी हो गई तेरे जाने के बाद यही रह गई।
वक़्त ने चेहरों को बदलते देखा दिल वही रहा बस भरोसा टूटा।
हमने हर रिश्ते को दिल से निभाया और बदले में बस सन्नाटा पाया।
अगर मुकम्मल होती ये कहानी तो शायद ये ग़ज़ल अधूरी न होती।

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