मुस्कुराने की आदत थी कभी आज वजह ढूँढनी पड़ती है।
जिसे अपना सब कुछ माना था वही सबसे बड़ा अधूरापन बन गया।
हमने चाहा बहुत ख़ामोशी से और बदले में तन्हाई मिली।
वो दूर क्या हुआ हमसे ज़िंदगी ही रूठ गई।
कुछ दर्द बताए नहीं जाते बस आँखों में उतर आते हैं।
दिल ने भरोसा किया था जिस पर उसी ने सबसे ज़्यादा तोड़ा।
आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं जहाँ उसने कहा था—इंतज़ार करना।
हम आज भी वही हैं बस खुश रहने का हुनर खो बैठे हैं।
तेरी यादें भी अजीब हैं सुकून भी देती हैं दर्द भी।
रातें लंबी हो गई हैं और नींद हमसे नाराज़।
हमने छोड़ा नहीं कभी बस वक़्त ने जुदा कर दिया।
जिसे समझा सबसे खास वही सबसे दूर निकल गया।
अब किसी से शिकायत क्या करें अपनी ही पसंद ने रुलाया है।
दिल आज भी मान जाता है जब नाम तेरा आता है।
कुछ कहानियाँ पूरी नहीं होतीं बस याद बनकर रह जाती हैं।
सैड शायरी
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