हम चुप रहे तो सबने समझा सब ठीक है खामोशी भी यहाँ एक जवाब होती है।
जिसे अपना समझा उम्र भर वही सबसे पहले दूर निकला।
मुस्कुराना आदत बन गई है वरना दर्द आज भी ताज़ा है।
कुछ रिश्ते आवाज़ नहीं करते बस धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।
तन्हाई से अब शिकायत नहीं इसने ही सबसे ज़्यादा साथ दिया।
हम बदल गए वक्त के साथ और वजह लोग खुद थे।
हर सवाल का जवाब चुप्पी है क्योंकि सच बोलना मुश्किल है।
आँखों में ठहरा दर्द आँसू बनकर गिरने से डरता है।
हम आज भी उसी मोड़ पर हैं जहाँ से तुमने जाना था।
दिल ने चाहा बहुत समझाना पर किस्मत ने सुना ही नहीं।
कुछ यादें उम्र भर साथ चलती हैं भले ही लोग दूर हो जाएँ।
दर्द की भी एक हद होती है पर मोहब्बत बेइंतहा होती है।
लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं अक्सर जब दर्द ज़्यादा हो।
हमने हार मान ली मुस्कान से अब चुप रहना ही बेहतर लगा।
जो मिला ही नहीं कभी उसके खोने का दर्द भी अजीब है।
शेर
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