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शेर

हमने चाहा था जिसे टूटकर कभी वही हमें तोड़ गया चुपचाप कहीं।
खामोशी ही अब पहचान बन गई लफ़्ज़ों में कहने की हिम्मत खो गई।
हर दर्द को मुस्कान में छुपा लिया यही हुनर हमने वक़्त से सीख लिया।
भीड़ में रहकर भी तन्हा रहे किसी अपने के बिना अधूरे रहे।
वो वादा करके भी भूल गया और हम उम्र भर याद करते रहे।
कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगे पूरे होते तो शायद टूट जाते।
दिल ने जिस पर भरोसा किया उसी ने सबसे ज़्यादा ज़ख़्म दिया।
वक़्त ने सिखा दी सब्र की अदा अब हर बात पर रोना नहीं आता।
तेरी यादों का सिलसिला यूँ चला हर रात हमें सोने नहीं देता।
हम आज भी वहीं खड़े हैं जहाँ तुमने हमें छोड़ा था।
किसी को खोकर ये समझ आया हर हँसी के पीछे दर्द छुपा होता है।
दिल टूटा तो एहसास हुआ मोहब्बत आसान नहीं होती।
तेरे बिना भी जीना पड़ता है ये हुनर भी दर्द सिखा देता है।
हमने खुद को बहुत समझाया पर दिल को मना नहीं पाया।
अब शिकायत किससे करें जब अपना ही पराया हो गया।

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