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सैड शायरी

हम हँसते रहे सबको खुश करने के लिए अंदर से टूटते रहे किसी को बताए बिना।
जिसे अपना समझा था हर पल में वही हमें सबसे ज़्यादा अकेला कर गया।
ख़ामोशी भी अब चुभने लगी है जब से तू बातें करना भूल गया है।
दर्द लिखना पड़ा काग़ज़ पर क्योंकि सुनने वाला कोई नहीं था।
हम आज भी उसी इंतज़ार में हैं जहाँ से लौटना तुम भूल गए थे।
दिल तोड़ने वालों को क्या खबर टूटे दिल कितनी देर रोते हैं।
मुस्कान उधार की है जनाब वरना ज़ख़्म तो आज भी ताज़ा है।
तेरी यादें आज भी ज़िंदा हैं बस हमारे सपने मर गए हैं।
हमने छोड़ना सीख लिया है वरना हर कोई छोड़ ही जाता था।
तन्हाई से अब दोस्ती सी हो गई है लोग आते हैं दर्द दे जाते हैं।
जिस दिन दिल भर गया मेरा उस दिन आँखों ने बोलना शुरू कर दिया।
कभी कभी बहुत याद आते हो तुम और कभी बहुत दूर लगते हो।
हमने हर रिश्ता सच्चे दिल से निभाया और बदले में सिर्फ़ दर्द पाया।
वक़्त ने सिखा दिया सब कुछ बस किसी पर भरोसा करना भूल गए।
अब शिकायत भी किससे करें जब अपना ही अपना नहीं रहा।

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