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सैड शायरी

जिसे चाहा था दिल से ज़्यादा उसी ने दिल तोड़ दिया आधा।
हमने मुस्कुराना सीख लिया दर्द को भी छुपाना सीख लिया।
वो बदल गए वक़्त के साथ हम आज भी वहीं खड़े हैं।
दिल की आवाज़ कोई सुनता नहीं अब अपना दर्द कोई चुनता नहीं।
तेरे बिना अधूरी सी लगती है जिंदगी जैसे बिन बारिश सूखी सी ज़मीं।
हमने तो बस मोहब्बत की थी पर उसने हमें आदत समझ लिया।
रात भर जागते हैं तेरी याद में और सुबह फिर मुस्कुरा देते हैं।
अब शिकायत भी किससे करें जिसे चाहा वही बेवफा निकला।
दिल तो आज भी तेरा इंतज़ार करता है बस अब आवाज़ नहीं देता।
तू पास नहीं फिर भी पास लगता है तेरी यादों का ही साथ लगता है।
किसी को खोकर ये जाना हमने कि दर्द भी अपना सा लगता है।
हम तो टूट भी चुप रहे वो छोड़कर भी खुश रहे।
कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे होते हैं पूरा होकर अक्सर टूट जाते हैं।
आँसू छुपाकर हँसना पड़ता है दिल के ज़ख्मों को सहना पड़ता है।
मोहब्बत की थी बेइंतहा सज़ा भी मिली बेवजह।

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