तू साथ नहीं तो कुछ भी नहीं ये दिल अब कहीं भी नहीं।
हमने खुद को भुला दिया तेरे लिए तूने हमें ही भुला दिया।
जिन्हें अपना समझा था वही दर्द देकर चले गए।
अब मुस्कुराना आदत है वरना दिल तो आज भी रोता है।
वक़्त ने सब बदल दिया बस दर्द वही का वही रहा।
तेरे बिना ये शाम अधूरी है हर खुशी अब मजबूरी है।
दिल के टुकड़े समेटते रहे लोग तमाशा देखते रहे।
इश्क़ ने हमें रुलाया बहुत हमने भी खुद को छुपाया बहुत।
तेरी तस्वीर से बातें करते हैं क्योंकि तू तो अब सुनता नहीं।
हमारी वफ़ा का यही अंजाम हुआ दिल टूटकर बदनाम हुआ।
तेरे लौट आने की उम्मीद नहीं फिर भी इंतज़ार खत्म नहीं।
हर धड़कन में दर्द बसा है जैसे दिल में कोई किस्सा बसा है।
तूने छोड़ा तो समझ आया अपना कोई नहीं होता।
अब तो आँसू भी थक गए हैं दिल के ग़म कहाँ रुकते हैं।
कभी सोचा न था ऐसा होगा जिसे चाहा वही बेवफ़ा होगा।
सैड शायरी
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