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हिंदी ग़ज़ल

दिल की बस्ती में उजाला भी रहेगा कभी तेरे आने का इशारा भी रहेगा कभी रात कितनी ही अँधेरी क्यों न हो जाए मगर चाँद बनने का इरादा भी रहेगा कभी।
तेरी यादों का असर आज भी बाकी है मेरे दिल में वो सफर आज भी बाकी है वक्त बदला तो बहुत कुछ बदल गया लेकिन तेरे मिलने की खबर आज भी बाकी है।
हमने हर दर्द को सीने से लगाया है बहुत ज़िंदगी को भी हँसाकर ही निभाया है बहुत तू जो रूठा तो लगा जैसे खुदा रूठ गया हमने इस दिल को मगर फिर भी मनाया है बहुत।
वो जो ख्वाबों में मिला करता था दिल को चुपके से छुआ करता था आज भी उसकी हँसी कानों में जैसे कोई दिया जला करता था।
राहों में बिछे काँटे भी फूल हो जाएँगे तेरी यादों से ये मौसम भी क़बूल हो जाएँगे बस एक बार तू मुस्कुरा दे अगर मेरे ग़म भी मेरे उसूल हो जाएँगे।
चुपके से तेरी याद आई है रात भर दिल को रुलायी है सुबह होते ही लगा यूँ मुझको जैसे किस्मत फिर मुस्कुरायी है।
दिल में छुपा के रखा है तुझे ख्वाबों में सजा के रखा है तुझे दुनिया की नज़र न लगे तुझको पलकों में बसा के रखा है तुझे।
तेरी आवाज़ में जादू सा असर लगता है हर दुआ में तेरा ही जिक्र अक्सर लगता है तू जो पास हो तो ये दुनिया भी हसीं लगती है तेरे बिन हर खुशी भी बेअसर लगता है।
मौसम ने बदला है मिज़ाज अपना दिल ने फिर खोजा है राज अपना कितना भी भूलें मगर याद रहे तेरे नाम से जुड़ा है आज अपना।
रात की चादर में तारे सजे दिल के अफसाने किनारे सजे तेरे आने की उम्मीद लिए हमने हर ख्वाब हमारे सजे।
तेरे बिन सूना सा लगता है जहाँ जैसे वीरान हो सारा आसमाँ तू जो हँस दे तो लगे यूँ मुझको फिर से रोशन हुआ सारा जहाँ।
ज़िंदगी तेरी मोहब्बत से सजी है हर खुशी तेरी इनायत से सजी है दर्द भी कम लगने लगे मुझको जब से ये रूह तेरी चाहत से सजी है।
तेरे ख्यालों में खोया रहता हूँ हर पल तेरा ही होता रहता हूँ तू जो मिल जाए मुकम्मल मुझको मैं खुद से भी जुदा सा रहता हूँ।
रिश्तों की डोर बड़ी नाज़ुक है हर लम्हा इसमें एक जज़्बा मुख़्तलिफ़ है जो संभाल ले इसे प्यार से उसका हर मौसम फिर ख़ूबसूरत है।
तेरे इश्क़ में हम दीवाने हुए हर दर्द में भी मुस्काने हुए तू जो मिला तो लगा यूँ जैसे सूखे गुलशन फिर से बहारें हुए।

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