दिल में जो राज़ था कह न सके तेरे बिन हाल-ए-दिल सह न सके।
तेरी यादों का असर ऐसा है नींद आए भी तो सो न सके।
इश्क़ में हमने ये जाना है हँसता चेहरा भी वीराना है।
वक़्त बदला तो लोग बदल गए अपने ही हमसे दूर निकल गए।
तेरी आँखों में जो नूर मिला उससे रौशन हर सुरूर मिला।
हमने चाहा तुझे खुद से बढ़कर तूने समझा हमें बस एक सफर।
रात भर चाँद से बातें कीं दर्द फिर भी वही बाकी था।
दिल को समझाना आसान नहीं इश्क़ कोई मेहमान नहीं।
जिसे अपना समझा था दिल ने वही सबसे अनजान निकला।
तेरे बिन सूनी सी राहें हैं जैसे बिन मौसम की चाहें हैं।
हमने हर ग़म को हँसकर सहा दिल ने तेरा नाम ही कहा।
ख़्वाब टूटे तो हकीकत समझी अपनों में भी सियासत समझी।
आँखों में नमी सी रहती है तेरी कमी सी रहती है।
अब न उम्मीद है न गिला कोई दिल में बस एक सिलसिला कोई।
तेरी चाहत में डूबे ऐसे किनारा भी अब किनारा न रहे।
शेर
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