छोटे से शहर की एक शांत सी लाइब्रेरी में पहली बार आरव ने उसे देखा था।
सफेद सलवार-सूट में, किताबों के बीच बैठी, जैसे कोई कहानी खुद लिखी जा रही हो।
उसका नाम था — सिया।
आरव ने किताब लेने का बहाना किया,
पर असल में वो उसकी एक मुस्कान लेने आया था।
पहली मुलाकात में सिर्फ “हैलो” हुआ,
पर दिल में जैसे पूरी दास्तान शुरू हो गई।
दिन बीतते गए…
लाइब्रेरी अब पढ़ाई की जगह कम,
मुलाकातों की जगह ज्यादा बन गई।
कभी एक ही टेबल पर बैठना,
कभी चुपके से कॉफी रख देना,
कभी बिना वजह मुस्कुरा देना।
एक दिन बारिश हो रही थी।
सिया छतरी भूल गई थी।
आरव ने अपनी छतरी आगे कर दी —
“चलो, साथ चलते हैं।”
उस छोटी सी छतरी के नीचे,
दो दिलों की दूरी भी कम हो गई।
मोहब्बत कब इकरार में बदल गई,
उन्हें खुद भी पता नहीं चला।
बस एक शाम, डूबते सूरज के सामने
आरव ने कहा —
“अगर तुम साथ हो, तो हर रास्ता आसान है।”
सिया मुस्कुरा दी…
और वो मुस्कान ही उसका जवाब थी।
लेकिन कहानी इतनी आसान कहाँ होती है…
सिया के घरवालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी।
आरव ने पहली बार खुद को बेबस महसूस किया।
आखिरी मुलाकात में,
सिया ने कहा —
“प्यार कभी खत्म नहीं होता,
बस हालात उसे बदल देते हैं।”
दोनों अलग हो गए…
पर मोहब्बत नहीं।
सालों बाद,
उसी लाइब्रेरी में आरव फिर आया।
वही कोना, वही मेज़…
बस सिया नहीं थी।
लेकिन मेज़ पर एक पुरानी किताब में
एक पन्ना रखा था —
जिस पर लिखा था:
"कुछ प्रेम कहानियाँ साथ रहने के लिए नहीं,
हमेशा याद रहने के लिए होती हैं।" ❤️
आरव मुस्कुराया…
आँखें नम थीं,
पर दिल शांत था।
क्योंकि सच्चा प्यार कभी अधूरा नहीं होता,
वो बस यादों में पूरा हो जाता है।