छोटे से गाँव में आरव और सिया बचपन के दोस्त थे।
स्कूल की वही पुरानी बेंच, वही आम का पेड़ और वही रास्ता… जहाँ उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।
आरव हमेशा सिया को चिढ़ाता था, और सिया हर बार नाराज़ होने का नाटक करती थी।
पर सच तो ये था कि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे थे।
समय बीता… पढ़ाई के लिए आरव शहर चला गया।
दूरी बढ़ी, पर दिलों की धड़कनें और करीब हो गईं।
हर रात फोन पर बातें, हर सुबह “गुड मॉर्निंग” का इंतज़ार — उनका प्यार अब इम्तिहान से गुजर रहा था।
एक दिन आरव बिना बताए गाँव लौट आया।
बरसात की हल्की फुहारें थीं।
सिया मंदिर की सीढ़ियों पर खड़ी थी… तभी पीछे से आवाज़ आई —
“अब और दूर नहीं रह सकता…”
सिया मुड़ी… आँखों में आँसू, होंठों पर मुस्कान।
आरव ने हाथ बढ़ाया और कहा —
“क्या तुम हमेशा के लिए मेरी बनोगी?”
सिया ने धीरे से उसका हाथ थाम लिया।
बारिश गवाह बनी, मंदिर की घंटियाँ बजीं…
और दो दिल हमेशा के लिए एक हो गए। ❤️
