सैड शायरी

दिल तो आज भी करता है तुमसे बात करने का पर ये सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहीं तुम्हें तकलीफ़ न हो। कभी सोचा नहीं था कि वो दिन भी आएगा जब मुस्कुराने की वजह भी याद करनी पड़ेगी। हमने तो दिल से चाहा था उन्हें पर उन्होंने हमें बस वक्त गुज़ारने के लिए चाहा। कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं पूरे हो जाएँ तो दर्द दे जाते हैं। अब शिकायत भी किससे करें जिसने दर्द दिया वही अपना था। तुम्हारी यादें आज भी रुला देती हैं और तुम कहते हो कि सब भूल जाओ। दिल के जख्म दिखाए नहीं जाते बस मुस्कुराकर छुपाए जाते हैं। वो बदल गए और हम समझते रहे कि शायद हमारी ही गलती होगी। कभी किसी से इतनी उम्मीद मत रखना कि टूटने पर खुद से नज़रें मिलाना मुश्किल हो जाए। आज फिर तन्हाई ने हाथ थाम लिया जब अपने भी बेगाने लगने लगे। तुम्हें खोकर इतना समझ आया कोई अपना होकर भी अपना नहीं होता। मोहब्बत तो सच्ची थी हमारी बस किस्मत को ही मंज़ूर नहीं थी। अब तो आदत सी हो गई है दर्द सहने की कभी रो भी लें तो फर्क नहीं पड़ता। कुछ लोग दिल में बस जाते हैं पर किस्मत में नहीं होते। जिसे अपना समझा वही छोड़ गया अब किसी पर भरोसा करने से डर लगता है।

दिल तो आज भी करता है तुमसे बात करने का पर ये सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहीं तुम्हें तकलीफ़ न हो।कभी सोचा नहीं था कि वो दिन भी आएगा जब मुस्कुराने की वजह भी याद करनी पड़ेगी।
हमने तो दिल से चाहा था उन्हें पर उन्होंने हमें बस वक्त गुज़ारने के लिए चाहा।
कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं पूरे हो जाएँ तो दर्द दे जाते हैं।
अब शिकायत भी किससे करें जिसने दर्द दिया वही अपना था।
तुम्हारी यादें आज भी रुला देती हैं और तुम कहते हो कि सब भूल जाओ।
दिल के जख्म दिखाए नहीं जाते बस मुस्कुराकर छुपाए जाते हैं।
वो बदल गए और हम समझते रहे कि शायद हमारी ही गलती होगी।
कभी किसी से इतनी उम्मीद मत रखना कि टूटने पर खुद से नज़रें मिलाना मुश्किल हो जाए।
आज फिर तन्हाई ने हाथ थाम लिया जब अपने भी बेगाने लगने लगे।
तुम्हें खोकर इतना समझ आया कोई अपना होकर भी अपना नहीं होता।
मोहब्बत तो सच्ची थी हमारी बस किस्मत को ही मंज़ूर नहीं थी।
अब तो आदत सी हो गई है दर्द सहने की कभी रो भी लें तो फर्क नहीं पड़ता।
कुछ लोग दिल में बस जाते हैं पर किस्मत में नहीं होते।
जिसे अपना समझा वही छोड़ गया अब किसी पर भरोसा करने से डर लगता है।

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