हमने ख़ामोशी से निभाया हर रिश्ता शोर करने वालों को फ़ुर्सत कहाँ थी समझने की।
वो पूछते हैं हाल हमारा और हम सोचते हैं—सच कहें या मुस्कुरा दें।
दिल ने जिसे अपना समझा था वही सबसे बड़ा सबक बन गया।
कुछ लोग लफ़्ज़ों से नहीं अपने रवैये से चोट देते हैं।
हम आज भी वही हैं बस भरोसा करना छोड़ दिया है।
इश्क़ ने सिखाया चुप रहना वरना बोलने में हम भी माहिर थे।
तन्हाई से दोस्ती कर ली हमन अब भीड़ भी कम लगती है।
वक़्त ने सिखा दिया धीरे-धीरे हर अपना अपना नहीं होता।
तेरी एक नज़र ने सब बदल दिया वरना हम भी आम से थे।
दिल टूटता है आवाज़ नहीं करता इसलिए दर्द समझ में नहीं आता।
हम टूटे ज़रूर हैं पर बिखरे नहीं।
जिसे समझा सबसे करीब वही सबसे दूर निकल गया।
ख़्वाब वही टूटते हैं जिन्हें आँखों से ज़्यादा दिल ने देखा हो।
हमने छोड़ना नहीं सीखा इसीलिए अक्सर खुद को खो देते हैं।
अकेले चलना सीख लिया हमने अब भीड़ का सहारा नहीं चाहिए।
Sher-O-Shayari
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