छोटी प्रेम कहानी ❤️
रेलवे स्टेशन की उस भीड़ में, आरव ने उसे पहली बार देखा था। सफ़ेद सूट, आँखों में अजीब-सी शांति और होंठों पर हल्की मुस्कान। उसका नाम अनाया था—ये उसे बाद में पता चला।
दोनों की मुलाक़ातें रोज़ उसी प्लेटफ़ॉर्म पर होने लगीं। कभी चाय की प्याली पर, कभी ट्रेन के इंतज़ार में। बातें छोटी थीं, मगर एहसास गहरे। आरव ने महसूस किया कि कुछ रिश्ते नाम लेने से पहले ही दिल में जगह बना लेते हैं।
एक दिन अनाया नहीं आई। अगले दिन भी नहीं। तीसरे दिन आरव को उसकी लिखी एक चिट्ठी मिली—
“कुछ प्यार अधूरे रहकर भी पूरे होते हैं। मुझे जाना होगा, पर जो एहसास तुमने दिया, वो हमेशा साथ रहेगा।”
सालों बाद उसी स्टेशन पर, उसी चाय की दुकान के पास, अनाया फिर मिली। इस बार आँखों में वही शांति थी—और मुस्कान में वक़्त की समझ।
आरव ने बस इतना कहा, “कुछ प्यार इंतज़ार भी सिखाते हैं।”
अनाया मुस्कुरा दी—जैसे कहानी वहीं से फिर शुरू हो गई।

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