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हिंदी ग़ज़ल

तेरी यादों की हवा जब चलती है दिल की हर दीवार नम हो जाती है।
हमने चाहा बहुत पर कह न सके लफ़्ज़ अक्सर ख़ामोश रह जाते हैं।
वो जो आए तो लगा बहार आई वो जो गए तो रुत बदल गई।
दिल को समझाया बहुत हर बार पर वो फिर भी तुझ पर ही ठहर गया।
ख़ामोशी में भी तेरी आवाज़ है इस दिल को आज भी तुझ पर नाज़ है।
वक़्त ने बदला बहुत कुछ ज़िंदगी में पर इश्क़ का रंग फीका न हुआ।
तेरे बिना भी जीना सीख लिया हमने पर जीने की वजह आज भी तू है।
हम अकेले ही चले थे इस सफ़र पर तेरा नाम हमसफ़र बन गया।
कुछ रिश्ते अधूरे ही अच्छे लगते हैं पूरे हों तो कहानी खत्म हो जाती है।
आँखों में ठहरी जो तस्वीर तेरी वो आज भी हर ख्वाब में उतर आती है।
हमने हर दर्द को ग़ज़ल बना लिया तभी तो दिल थोड़ा हल्का हो गया।
तेरी बेरुख़ी ने बहुत कुछ सिखाया पर मोहब्बत से नफ़रत न करा पाई।
हम टूटे भी तो आवाज़ न आई शायद आदत थी चुपचाप सहने की।
दिल की किताब में तेरा नाम आज भी सबसे ख़ूबसूरत पन्ना बनकर है।
अगर इश्क़ मुकम्मल होता ज़रूर तो शायद ये ग़ज़ल अधूरी न होती।

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