तेरे बिना ये शहर भी वीरान सा लगा हर रास्ता आज मुझसे अनजान सा लगा।
ख़ामोशी ने भी आज तेरी बात की हर सांस में बस तेरी ही याद की।
वक़्त से हमने ये सवाल कर लिया क्या इश्क़ में सब कुछ हार लिया?
दिल ने जो चाहा वो मुकम्मल न हुआ फिर भी ये दिल तुझसे गिला न हुआ।
तेरी यादों का ये सिलसिला क्या कहें हर रात हम खुद से ही लड़ते रहें।
हमने चाहा बहुत, जताया नहीं यही खामोशी हमारी सज़ा बनी।
तू दूर होकर भी पास सा लगता है यही इश्क़ हर दूरी में जलता है।
तन्हाई ने भी आज साथ निभाया तेरे बाद उसी को हमने अपनाया।
जो लिखा था किस्मत में वही हो गया हर सपना धीरे-धीरे सो गया।
तेरे लफ़्ज़ों का असर कुछ यूँ हुआ दिल ने हर डर से रिश्ता तोड़ लिया।
मोहब्बत में शर्तें नहीं होतीं वरना दिल टूटने से पहले रुक जाता।
हमने हर ज़ख़्म को मुस्कान दी दुनिया ने बस हमारी हँसी देखी।
वक़्त ने चेहरों को बदलते देखा दिल वही रहा बस भरोसा टूटा।
अगर मुकम्मल होती ये कहानी तो शायद ये ग़ज़ल अधूरी न होती।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कहे नहीं जाते वही लफ़्ज़ बनकर ग़ज़ल हो जाते।
हिंदी ग़ज़ल
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