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शेर

हमने हर दर्द को लफ़्ज़ों में ढाला ताकि कोई हमारे आँसू न देख पाए। वो चुप रहे और हम समझते रहे यही हमारी सबसे बड़ी गलती थी। दिल ने बहुत भरोसा किया था इसीलिए टूटकर भी आवाज़ नहीं आई। कुछ लोग पास होकर भी दूर होते हैं और कुछ दूर होकर भी दिल में रहते हैं। ख़ामोशी अब हमारी पहचान बन गई है क्योंकि हर बात कहने लायक नहीं होती। हम आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं जहाँ वादे अधूरे रह गए थे। जिसे अपना समझा वही पराया निकला ये सबक देर से समझ आया। हमने चाहा बहुत जताया नहीं और वो समझे कि हमें फ़र्क नहीं पड़ा। तन्हाई से अब कोई शिकायत नहीं उसने ही हर रात साथ निभाया है। वक़्त ने चेहरे बदले रिश्ते बदले बस हमारा इंतज़ार नहीं बदला। कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब वक़्त भी नहीं देता। हम टूटे भी तो किसी को खबर न हुई क्योंकि मुस्कान निभानी ज़रूरी थी। तेरे बाद किसी और से दिल नहीं लगा ये डर भी इश्क़ की निशानी बन गया। भीड़ में भी अकेले रहना सीख लिया क्योंकि साथ देने वाले कम होते हैं। अगर मोहब्बत मुकम्मल होती तो शायद ये शेर न लिखे जाते
हमने हर दर्द को लफ़्ज़ों में ढाला ताकि कोई हमारे आँसू न देख पाए।
वो चुप रहे और हम समझते रहे यही हमारी सबसे बड़ी गलती थी।
दिल ने बहुत भरोसा किया था इसीलिए टूटकर भी आवाज़ नहीं आई।
कुछ लोग पास होकर भी दूर होते हैं और कुछ दूर होकर भी दिल में रहते हैं।
ख़ामोशी अब हमारी पहचान बन गई है क्योंकि हर बात कहने लायक नहीं होती।
हम आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं जहाँ वादे अधूरे रह गए थे।
जिसे अपना समझा वही पराया निकला ये सबक देर से समझ आया।
हमने चाहा बहुत जताया नहीं और वो समझे कि हमें फ़र्क नहीं पड़ा।
तन्हाई से अब कोई शिकायत नहीं उसने ही हर रात साथ निभाया है।
वक़्त ने चेहरे बदले रिश्ते बदले बस हमारा इंतज़ार नहीं बदला।
कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब वक़्त भी नहीं देता।
हम टूटे भी तो किसी को खबर न हुई क्योंकि मुस्कान निभानी ज़रूरी थी।
तेरे बाद किसी और से दिल नहीं लगा ये डर भी इश्क़ की निशानी बन गया।
भीड़ में भी अकेले रहना सीख लिया क्योंकि साथ देने वाले कम होते हैं।
अगर मोहब्बत मुकम्मल होती तो शायद ये शेर न लिखे जाते।

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